भारतीय कला के आदर्श — हिंदी सारांश
लेखक: ई. बी. हैवेल
श्रेणी: संस्कृति
पुस्तक का परिचय
भारतीय कला के आदर्श का मुख्य फोकस है: भारतीय कला के आध्यात्मिक-सांस्कृतिक आदर्शों की औपनिवेशिक कालीन पुनर्व्याख्या। इस Booknomics पृष्ठ में मूल पुस्तक की नकल या अध्याय-दर-अध्याय पुनर्रचना नहीं की गई है। कला-संस्कृति के पुराने अध्ययनों में औपनिवेशिक और राष्ट्रवादी दोनों प्रकार की पूर्वधारणाएँ हो सकती हैं; उन्हें ऐतिहासिक संदर्भ के साथ पढ़ना चाहिए।
मुख्य विचार
कला-दृष्टि। भारतीय कला के आदर्श में कला-दृष्टि रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। प्रतीक। भारतीय कला के आदर्श में प्रतीक रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। शिल्प। भारतीय कला के आदर्श में शिल्प रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। सामाजिक संदर्भ। भारतीय कला के आदर्श में सामाजिक संदर्भ रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। धर्म और दर्शन। भारतीय कला के आदर्श में धर्म और दर्शन रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। सौंदर्यशास्त्र। भारतीय कला के आदर्श में सौंदर्यशास्त्र रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। कारीगर। भारतीय कला के आदर्श में कारीगर रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है। संस्था। भारतीय कला के आदर्श में संस्था रूप और अर्थ के बीच संबंध समझने का एक महत्वपूर्ण प्रवेश-बिंदु है।